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Hanuman Chalisa lyrics

  • Writer: Mirabai
    Mirabai
  • Aug 20, 2025
  • 2 min read



श्री हनुमान चालीसा

दोहा


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥


बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।

बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ॥


चौपाई


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥


राम दूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥


महाबीर बिक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुँचित केसा ॥


हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे ।

काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥


शंकर सुवन केसरी नंदन ।

तेज प्रताप महा जगवंदन ॥


विद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मनबसिया ॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा ।

विकट रूप धरि लंक जरावा ॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचंद्र के काज सवाँरे ॥


लाय सजीवन लखन जियाए ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाए ॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई ॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।

लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ।

लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही ।

जलधि लाँघि गए अचरज नाही ॥


दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥


राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत ना आज्ञा बिनु पैसारे ॥


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहु को डरना ॥


आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तै कापै ॥


भूत पिशाच निकट नहि आवै ।

महावीर जब नाम सुनावै ॥


नासै रोग हरे सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥


संकट तै हनुमान छुडावै ।

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥


सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिनके काज सकल तुम साजा ॥


और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥


चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥


साधु संत के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥


राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥


तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥


अंतकाल रघुवरपुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥


और देवता चित्त ना धरई ।

हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥


संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥


जै जै जै हनुमान गुसाईँ ।

कृपा करहु गुरु देव की नाई ॥


जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ।

होय सिद्ध साखी गौरीसा ॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥


दोहा


पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥


॥ सियावर रामचन्द्र की जय ॥

॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥

॥ उमापति महादेव की जय ॥

॥ बोलो रे भई सब सन्तन की जय ॥


 
 
 

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