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Ram Ko Dekh Ke Shri Janak Nandini Lyrics

  • Writer: Mirabai
    Mirabai
  • Aug 20, 2025
  • 1 min read



राम को देख कर के जनक नंदिनी,

बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ।


राम देखे सिया माँ सिया राम को,

चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी ॥


थे जनक पुर गये देखने के लिए,

सारी सखियाँ झरोखो से झाँकन लगे ।

देखते ही नजर मिल गयी प्रेम की,

जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी ॥

राम को देख कर के जनक नंदिनी...॥


बोली एक सखी राम को देखकर,

रच गयी है विधाता ने जोड़ी सुघर ।

फिर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर,

मन में शंका बनी की बनी रह गयी ॥

राम को देख कर के जनक नंदिनी...॥


बोली दूसरी सखी छोटन देखन में है,

फिर चमत्कार इनका नहीं जानती ।

एक ही बाण में ताड़िका राक्षसी,

उठ सकी ना पड़ी की पड़ी रह गयी ॥

राम को देख कर के जनक नंदिनी...॥


राम को देख कर के जनक नंदिनी,

बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ।

राम देखे सिया माँ सिया राम को,

चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी ॥

 
 
 

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